By- Rebecca Samantha Deena
Trying to survive the modern world.

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Rebecca Samantha Deena

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मैं वो लड़की नहीं

Poem




हज़ार हिरों में तू जिस मोती को धूंडे,

मैं वो मोती नहीं।

हज़ार तारों में तू जिस चांद को धुंडे,

मैं वी चांद नहीं।


जो रातों को तेरी नींद उड़ा जाए,

मैं वो ख़्वाब नहीं।

जो धीरे से तेरे दिल के तार छेड़ जाए,

मैं वो ताल नहीं।


जो शब्द बनकर तेरे पन्नों को भर दे,

मैं वो सीयाही नहीं।

जो मीठा सा दर्द देकर तेरे दिल को भरदे,

मैं वो एहेसास नहीं।


जो तेरे खाबों में बसे 

और खुशी बनकर तेरे चेहरे पर उतर आए 

मैं वी मुस्कान नहीं

जो रातों को तेरी नींद उड़ा जाए 

और तेरे दिल में अपना घर कर जाए

मैं वो लड़की नहीं।





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